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संदेश

हिंदी के कर्मठ योद्धा बालकवि बैरागी

यह जानकर बहुत दुःख हुआ कि बालकवि बैरागी जी हमारे बीच नहीं रहें। वे हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि थे,इसके अलावा वे हिंदी भाषा के एक कर्मठ योद्धा थे।मैंने उनके भाषण दिल्ली में सुने थे। मेरा यह सौभाग्य रहा कि मैंने उनकी कुछ हिंदी कविताओं का मराठी में अनुवाद किया था। जिसके बारे में उन्होंने मुझे बधाई देते हुए कहा था कि मराठी अनुवाद उन्होंने उनके तत्कालीन मराठी सांसद मित्रों को दिखाया था जो उनको पसंद आया था।
मैं जब दूरसंचार विभाग में हिंदी अनुवादक था तब हमारे कैडर की समस्या के बारे में उनके साथ पत्राचार होता था।वे तब राज्य सभा के सांसद थे। मेरा आवेदन पत्र उन्होंने एक बार सीधे तत्कालीन गृह मंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भेजा था और गृह मंत्री जी द्वारा प्राप्त जवाबी पत्र भी मुझे भेज दिया था।वे कहते थे कि हिंदी भाषा की लड़ाई बहुत लंबी है।यहां थक कर हार मानना नहीं चाहिए।
बालकवि बैरागी अपने सुंदर हस्ताक्षर में पत्र भेजते थे।मैंने उनके पत्रों को संभाल कर रखा है। एक हिंदी भाषा समर्थक कर्मठ योद्धा अंतिम यात्रा पर चल पड़ा है।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
💐💐💐
विजय नगरकर
अहमदनगरबालकवि बैरागी…
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हिंदी संगोष्ठी की दावत

*हिंदी संगोष्ठी* 😀😀😀
जिस प्रकार घटिया से घटिया लेख के शीर्षक के आगे सेमिकोलन लगा कर “एक तथ्यपरक अध्ययन” या “एक व्यवहारिक समीक्षा” जैसे ज्ञान-टपकाऊ और प्रज्ञा भड़काऊ शब्द जोड़कर या फिर किसी दो कौड़ी के व्याख्यान के अंत में ट्रक के पीछे लिखे-पढ़े जाने वाले शेर पढ़कर क्रमशः टटपूंजिया लेखक और थर्ड ग्रेड का कंपायमान वक्ता भी आत्ममुग्धता के मोड़ में आ जाता है उसी प्रकार बेसिर-पैर की संगोष्ठी में भी रसना सुखदायी उदरपूजन और घर-परिवार की किच-किच से दूर मध्यम वर्गीय जीवन से कूटे पीसे प्रतिभागी के लिए 3 स्टार होटल में आरामदायक आवास की व्यवस्था कर-करा कर संयोजक सेमिनार को महासफल होने की स्वघोषण कर देता है और इसका प्रमाणपत्र अपने गले में टांग लेता है। यह दुःखद आश्चर्य है कि मैंने आज तक किसी भी सेमिनार को असफल बताते हुए किसी आयोजक के मुख से नहीं सुना । जिस प्रकार इस देश में कभी कोई पार्टी चुनाव हारती नहीं बल्कि सूपड़ासाफ हार पर भी उसकी नैतिक जीत होती है उसी प्रकार इस देश में कभी कोई सेमिनार न असफल होता है और न कभी होगा ...!! पर हां जे बात है कि सेमिनार के टेक्निकल एक्सपर्टों ने सेमिनार की सफलता के स्तर…

भारती लिपि

भारती लिखावट कुंजीपटल
भारती को भारत के लिए एक आम स्क्रिप्ट के रूप में  प्रस्तावित किया जा रहा है। रोमन लिपि को कई यूरोपीय भाषाओं (अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, इतालवी आदि) के लिए एक आम स्क्रिप्ट के रूप में उपयोग किया जाता है, जो उन भाषाओं में बोलने और लिखने वाले देशों में संचार की सुविधा प्रदान करता है। इसी तरह पूरे देश के लिए एक आम स्क्रिप्ट भारत में कई संचार बाधाओं को दूर करने में मदद मिलेगी ।
भारती लिखावट कुंजीपटल भारतीय भाषाओं में पाठ / पाठ प्रविष्टि के लिए एक हस्तलेखन आधारित इनपुट उपकरण है। भारती एक सरल और एकीकृत स्क्रिप्ट है जिसका उपयोग सबसे बड़ी भारतीय भाषाओं को लिखने के लिए किया जा सकता है। यह सरल आकारों का उपयोग करके डिज़ाइन किया गया है, अक्सर विभिन्न भारतीय भाषाओं / स्क्रिप्ट्स से सरल अक्षर उधार लेता है भारती पात्रों को इस तरह बनाया गया है कि चरित्र की ध्वनि (ध्वन्यात्मकता) अपने आकार में परिलक्षित होती है, और इसलिए याद रखना आसान है। समर्थित भाषाओं: हिंदी / मराठी (देवनागरी स्क्रिप्ट), बंगाली, पंजाबी / गुरुमुखी, गुजराती, उड़िया, तेलुगु, कन्नड़, तमिल और मलयालम हैं। भारती वर्णों और उ…

अनुवाद दिवस

आज 30 सितंबर आंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस है। अंग्रेजी विकिपीडिया पर जो जानकारी उपलब्ध थी उसको गुगल ट्रांसलेट द्वारा हिंदी अनुवाद करके देखा जो करीब करीब
सही मिल रहा है।आज तकनीकी विकास के कारण गुगल ने भी अनुवाद प्रक्रिया में सुधार किया है।पहले गुगल शब्द के स्थान पर शब्द का अनुवाद करता था , अब वाक्य के स्थान पर वाक्य का अनुवाद प्राप्त हो रहा है।अनुवाद दिवस के अवसर पर आइए हम सब मिलकर गुगल अनुवाद में सुधार करें ताकि भविष्य में अनुवाद सेतु मजबूत बनें, कई बार इस सेतु पर फिसलन ज्यादा है।
हिंदी विकिपीडिया में अब तक अनुवाद दिवस लेख नहीं है।
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(गुगल अनुवाद) अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस हर साल 30 सितंबर को सेंट जेरोम के पर्व पर मनाया जाता है, बाइबिल अनुवादक जिसे अनुवादकों के संरक्षक संत माना जाता है। 1 9 53 में स्थापित होने के बाद से यह समारोह एफआईटी (अंतर्राष्ट्रीय अनुवादकों की अंतर्राष्ट्रीय संघ) द्वारा प्रोत्साहित किया गया है। 1 99 1 में एफआईटी ने एक आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस का विचार शुरू किया, ताकि दुनिया भर में अनुवाद समुदाय की एकता को बढ़ावा मिल…

भारत सरकार के प्रथम हिंदी अधिकारी- हरिवंश राय बच्चन

स्वतंत्र भारत के प्रथम हिंदी अधिकारी जिन्हें  देश के भूतपूर्व प्रधान मंत्री पंडित नेहरू जी ने नियुक्त किया था।सही मायने में हिंदी कैडर के संस्थापक अधिकारी।सादर नमन। हरिवंश राय बच्चन जी ने दशद्वार से सोपान तक आत्म चरित्र में सरकारी कार्यालय में हिंदी की स्थिति का वर्णन किया है।
अनुवाद नीति, हिन्दी की दुर्दशाबच्चन जी दिल्ली में  विदेश मंत्रालय में अनुवाद करने का कार्य करते थे। वे अनुवाद की नीति के बारे में कहते हैं,‘भाषा सरल-सुबोध होगी
पर बोलचाल के स्तर पर गिरकर नहीं
लिखित भाषा के स्तर पर उठकर, अगर अनुवाद को
सही भी होना है।
और मेरा दावा है कि लिखित हिन्दी अंग्रेजी के ऊंचे से ऊंचे स्तर को छूने की क्षमता आज भी रखती है।’
वे भाषा के प्रथम आयोग के परिणामो के बारे में दुख प्रगट करते हुऐ कहते हैं कि,‘सबसे दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम था कि १५ वर्ष तक यानी १९६५ तक अंग्रेजी  की जगह पर हिंदी लाना न आवश्यक है, न संभव; सिद्धान्तत: हिंदी राजभाषा मानी जायगी, अंग्रेजी सहचरी भाषा; (व्यवहार में उसके विपरीत: अंग्रेजी राजभाषा, हिंदी सहचरी – अधिक उपयुक्त होगा कहना ‘अनुचरी’)। सरकारी प्रयास हिंदी के विभिन्न पक्षों …

गूगल से अनुवाद करना अब हुआ आसान

गूगल पर भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ और आसानगूगल ने आज भारतीय भाषाओं को लिए नए प्रोडक्ट और फीचर्स की घोषणा की है। आज से गूगल ट्रांसलेट गूगल की नई न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन तकनीक का इस्तेमाल करेगा। इसके तहत गूगल अंग्रेजी और भारत की 9 भाषाओं के बीच ट्रांसलेशन की सुविधा मुहैया कराएगा। गूगल अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं जैसे हिंदी, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु, गुजराती, पंजाबी, मलयालम और कन्नड के बीच ट्रांसलेशन की सुविधा देगा। न्यूरल ट्रांसलेशन तकनीक पुरानी तकनीक से कहीं बेहतर काम करेगा। गूगल ने यह भी घोषणा की है कि वह न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन तकनीक को गूगल क्रोम ब्राउजर में पहले से आने वाले ऑटो ट्रांसलेट फंक्शन में भी मुहैया कराएगा। इसके चलते भारतीय इंटरनेट पर मौजूद किसी भी पेज को भारत की कुल 9 भाषाओं में देख सकेंगे। ये नई ट्रांसलेशन सुविधा सभी यूजर्स के लिए गूगल सर्च और मैप में भी उपलब्ध होगी। ये ट्रांसलेशन सुविधा डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों पर मिलेगी। यह घोषणा इंडियन लैंग्वेजेज- डिफाइनिंग इंडियाज इंटरनेट शीर्षक के साथ गूगल और केपीएमजी की साझा रिपोर्ट के जरिए की गई है।
गूगल अब 9 भारतीय भाषाओं में उप…

इंग्लैंड में अंग्रेजी का संघर्ष

इंग्लैंड में अँग्रेजी कैसे लागू की गयी ?
-डॉ. गणपति चंद्र गुप्त
(भू. पू. कुलपति,कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय)संभवत: भारत में बहुत थोड़े लोग यह जानते हैं कि जिस प्रकार आज हम विदेशी भाषा – अँग्रेजी के प्रभाव से आक्रांत हो कर स्वदेशी भाषाओं की उपेक्षा कर रहे हैं, उसी प्रकार किसी समय इंग्लैंड भी विदेशी भाषा – फ्रेंच के प्रभाव से इतना अभिभूत था कि न केवल सारा सरकारी काम फ्रेंच में होता था, बल्कि उच्च वर्ग के लोग अँग्रेजी में बात करना भी अपनी शान के खिलाफ समझते थे। किंतु जब आगे चल कर फ्रेंच के स्थान पर अँग्रेजी लागू की गयी, तो उसका भारी विरोध हुआ और उसके विपक्ष में वे सारे तर्क दिये गये, जो आज हमारे यहाँ हिंदी के विरोध में दिये जा रहे हैं। फिर भी कुछ राष्ट्रभाषा – प्रेमी अंग्रेजों ने विभिन्न प्रकार के उपायों से किस प्रकार अँग्रेजी का मार्ग प्रशस्त किया, इसकी कहानी न केवल अपने – आप में रोचक है, बल्कि हमारी आज की हिंदी – विरोधी स्थिति के निराकरण के लिए भी उपयुक्त मार्ग सुझा सकती है।इंग्लैंड में अँग्रेजी का पराभव क्यों ?वैसे अँग्रेजी इंग्लैंड की अत्यंत प्रचीन भाषा रही है, यहाँ तक कि जब इस देश का न…