हिंदी भाषा का तकनीकी सफर
हिंदी भाषा का तकनीकी सफर
1980 के दशक के बुनियादी हार्डवेयर आधारित कोड से शुरू होकर आज रीयल-टाइम बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Generative AI) तक पहुँच चुका है।
जिस्ट (GIST) तकनीक और इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड
1983 - 1986
आईआईटी कानपुर और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग (DoE) ने जिस्ट (GIST) परियोजना शुरू की, जिससे पहली बार कंप्यूटर टर्मिनल पर भारतीय लिपियों को प्रोसेस करना संभव हुआ। 1986 में भारत सरकार ने सभी भारतीय लिपियों के लिए वैज्ञानिक कीबोर्ड लेआउट इनस्क्रिप्ट (InScript) का मानकीकरण किया।
सी-डैक (C-DAC) की स्थापना और जिस्ट कार्ड
1988
पुणे में सी-डैक की स्थापना के साथ हार्डवेयर आधारित जिस्ट कार्ड (GIST Card) विकसित किया गया। इसने डॉस (MS-DOS) आधारित कंप्यूटरों और डॉट-मैट्रिक्स प्रिंटरों पर बिना किसी विशेष ऑपरेटिंग सिस्टम के हिंदी और देवनागरी में डेटा एंट्री और प्रिंटिंग को सुगम बनाया।
ISCII मानक और यूनिकोड 1.0 में देवनागरी
1991
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भारतीय भाषा एन्कोडिंग के लिए ISCII (IS 13194:1991) मानक औपचारिक रूप से जारी किया। इसी वर्ष वैश्विक स्तर पर यूनिकोड कंसोर्टियम ने अपने पहले मानक (यूनिकोड 1.0) में देवनागरी वर्णों के लिए विशेष कोड ब्लॉक निर्धारित किया।
DTP क्रांति और गैर-यूनिकोड फॉन्ट युग
1995 - 1998
विंडोज आधारित डेस्कटॉप पब्लिशिंग (PageMaker, CorelDraw) के प्रसार के साथ कृतिदेव (Kruti Dev), देवलीस (Devlys) और चाणक्य जैसे ASCII आधारित रेमिंगटन फॉन्ट लोकप्रिय हुए। इसने हिंदी समाचार पत्रों और मुद्रण उद्योग में क्रांति ला दी, हालांकि ये फॉन्ट एक-दूसरे के सिस्टम में बिना संबंधित फॉन्ट फाइल इंस्टॉल किए नहीं खुलते थे।
विंडोज 2000 और 'मंगल' यूनिकोड फॉन्ट
2000
माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 2000 में ओपनटाइप (OpenType) और यूनिस्क्राइब (Uniscribe) जटिल पाठ रेंडरिंग इंजन पेश किया। ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ मंगल (Mangal) यूनिकोड फॉन्ट इनबिल्ट आया, जिसने टेक्स्ट को फॉन्ट-निर्भरता से मुक्त कर इंटरनेट और ईमेल पर बिना फॉन्ट डाउनलोड किए पठनीय बना दिया।
TDIL पहल और इंटरनेट पर हिंदी ब्लॉगिंग
2003
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के TDIL मिशन ने भारतीय भाषाओं के लिए मुफ्त फॉन्ट, शब्दकोश और टूल्स वितरित किए। इसी वर्ष हिंदी में पहले व्यक्तिगत ब्लॉग की शुरुआत हुई और वेब पर हिंदी सामग्री निर्माण का नया दौर आरंभ हुआ।
गूगल ट्रांसलिट्रेशन और ध्वन्यात्मक (Phonetic) टाइपिंग
2007
गूगल ने Google Indic Transliteration (गूगल इनपुट टूल्स) जारी किया। इसने आम इंटरनेट उपभोक्ताओं को अंग्रेजी कीबोर्ड पर सामान्य रोमन अक्षरों में लिखकर (उदा. 'namaste' लिखने पर 'नमस्ते') देवनागरी टाइप करने की सुविधा दी।
स्मार्टफोन और एंड्रॉइड में देवनागरी रेंडरिंग
2012
एंड्रॉइड 4.1 (Jelly Bean) में 'HarfBuzz' कॉम्प्लेक्स टेक्स्ट शेपिंग इंजन को पूरी तरह एकीकृत किया गया। इससे पहले मोबाइल स्क्रीन पर हिंदी मात्राएँ टूटकर या गलत जगह दिखती थीं, जो इस अपडेट के बाद सटीक रूप से प्रदर्शित होने लगीं।
गूगल इंडिक कीबोर्ड और मोबाइल वॉयस टाइपिंग
2015
स्मार्टफोन के लिए गूगल इंडिक कीबोर्ड (Google Indic Keyboard) ऐप जारी हुआ। इसमें टचस्क्रीन पर हाथ से लिखने (हैंडराइटिंग), स्वाइप टाइपिंग और वॉयस टाइपिंग की सुविधा मिली, जिससे 4G डेटा क्रांति के बाद करोड़ों नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए हिंदी में संवाद करना आसान हो गया।
IndicBERT और भारतीय नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP)
2020
आईआईटी मद्रास के शोध समूह 'AI4Bharat' द्वारा भारतीय भाषाओं के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित IndicBERT और IndicBART जैसे बहुभाषी ट्रांसफॉर्मर आधारित ओपन-सोर्स भाषा मॉडल जारी किए गए, जिन्होंने हिंदी में मशीन लर्निंग और टेक्स्ट विश्लेषण को गति दी।
राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन - 'भाषिणी' AI
2022
भारत सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया के तहत भाषिणी (Bhashini) एआई प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। यह हिंदी सहित 22 अनुसूचित भाषाओं के लिए ऑटोमैटिक स्पीच रिकग्निशन (ASR), टेक्स्ट-टू-स्पीच (TTS) और मशीन ट्रांसलेशन के ओपन-सोर्स एआई मॉडल और एपीआई प्रदान करता है।
जेनरेटिव AI और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs)
2023 - 2026
ChatGPT, Google Gemini और Claude जैसे अत्याधुनिक वैश्विक मॉडल्स ने हिंदी में उच्च-स्तरीय रचनात्मक लेखन, कोडिंग और तार्किक संवाद की क्षमता हासिल की। समानांतर रूप से भारत में हनुमान (Hanooman), कृत्रिम (Krutrim) और 'भाषिणी' संचालित रियल-टाइम स्पीच-टू-स्पीच ट्रांसलेशन मॉडल शासन, न्यायपालिका और सार्वजनिक सम्मेलनों में उपयोग किए जाने लगे।
राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) ने केंद्र सरकार के कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को सुगम, आधुनिक और त्वरित बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कई डिजिटल उपकरण और प्रणालियाँ विकसित की हैं।
कंठस्थ एवं कंठस्थ 2.0 (स्मृति-आधारित अनुवाद प्रणाली)
सी-डैक (C-DAC) के तकनीकी सहयोग से विकसित यह एक कंप्यूटर-सहायित अनुवाद प्रणाली (CAT - Computer Assisted Translation Tool) है।
यह पूर्व में किए गए अनुवादों को अपने अनुवाद स्मृति (Translation Memory) डेटाबेस में सुरक्षित रखता है। जब कोई नया दस्तावेज़ अनुवाद के लिए डाला जाता है, तो यह मिलते-जुलते वाक्यों के मानक अनुवाद स्वतः सुझा देता है।
इससे सरकारी फाइलों, संहिताओं और नियमों के अनुवाद में समय की बचत होती है और भाषाई एकरूपता बनी रहती है।
बहुभाषी अनुवाद सारथी 'भारती' (Bharati)
राजभाषा विभाग द्वारा तैयार किया गया यह एक उन्नत दस्तावेज़ अनुवाद और प्रबंधन पोर्टल है।
यह आधुनिक भाषा प्रौद्योगिकी और एआई मॉडल का उपयोग करके आधिकारिक फाइलों के त्वरित बहुभाषी अनुवाद व डेटाबेस प्रबंधन की सुविधा देता है।
लीला (LILA - Learn Indian Languages through Artificial Intelligence)
यह गैर-हिंदी भाषी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए तैयार किया गया एक मल्टीमीडिया स्वयं-शिक्षण (Self-Learning) वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप है।
इसके तहत प्रबोध, प्रवीण और प्राज्ञ पाठ्यक्रमों की पढ़ाई अंग्रेजी और 14 से अधिक प्रमुख भारतीय भाषाओं (तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला आदि) के माध्यम से की जा सकती है।
इसमें सही मौखिक उच्चारण सिखाने के लिए वाक् (Speech) तकनीक, वीडियो इंटरफेस और स्व-मूल्यांकन की सुविधा दी गई है।
ई-महाशब्दकोश एवं ई-सरल हिंदी वाक्यकोश
ई-महाशब्दकोश: प्रशासनिक एवं तकनीकी शब्दावली का द्विभाषी और द्विदिशीय (हिंदी-अंग्रेजी / अंग्रेजी-हिंदी) ऑनलाइन शब्दकोश व ऐप है। इसमें शब्दों के अर्थ के साथ-साथ उनका सही ऑडियो उच्चारण और व्याकरणिक संदर्भ भी उपलब्ध है।
ई-सरल वाक्यकोश: सरकारी टिप्पणियों (Noting) और प्रारूपण (Drafting) में बार-बार प्रयुक्त होने वाले मानक वाक्यों का द्विभाषी संग्रह, जिससे कर्मचारी सीधे मानक प्रशासनिक वाक्यांश चुनकर फाइलों पर काम कर सकें।
डिजिटल निगरानी व ई-प्रशासन (QPR और नराकास पोर्टल)
केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों द्वारा भेजी जाने वाली तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) को ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था।
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की बैठकों, निरीक्षणों और वार्षिक कार्यक्रमों के लक्ष्यों की प्रगति को ट्रैक करने के लिए ऑनलाइन प्रबंधन प्रणाली।
यूनिकोड और ओपन-सोर्स मानकीकरण
सरकारी तंत्र के सभी कंप्यूटरों में यूनिकोड समर्थित देवनागरी फॉन्ट (जैसे मंगल, एरियल यूनिकोड), इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड तथा फोनेटिक टाइपिंग को अनिवार्य रूप से लागू करने की नीति।
ई-ऑफिस (e-Office), सरकारी वे
बसाइटों और डिजिटल पोर्टलों को द्विभाषी स्वरूप में तैयार करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और मानकीकरण दिशानिर्देश।
राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) ने केंद्र सरकार के कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को सुगम, आधुनिक और त्वरित बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कई डिजिटल उपकरण और प्रणालियाँ विकसित की हैं।
कंठस्थ एवं कंठस्थ 2.0 (स्मृति-आधारित अनुवाद प्रणाली)
सी-डैक (C-DAC) के तकनीकी सहयोग से विकसित यह एक कंप्यूटर-सहायित अनुवाद प्रणाली (CAT - Computer Assisted Translation Tool) है।
यह पूर्व में किए गए अनुवादों को अपने अनुवाद स्मृति (Translation Memory) डेटाबेस में सुरक्षित रखता है। जब कोई नया दस्तावेज़ अनुवाद के लिए डाला जाता है, तो यह मिलते-जुलते वाक्यों के मानक अनुवाद स्वतः सुझा देता है।
इससे सरकारी फाइलों, संहिताओं और नियमों के अनुवाद में समय की बचत होती है और भाषाई एकरूपता बनी रहती है।
बहुभाषी अनुवाद सारथी 'भारती' (Bharati)
राजभाषा विभाग द्वारा तैयार किया गया यह एक उन्नत दस्तावेज़ अनुवाद और प्रबंधन पोर्टल है।
यह आधुनिक भाषा प्रौद्योगिकी और एआई मॉडल का उपयोग करके आधिकारिक फाइलों के त्वरित बहुभाषी अनुवाद व डेटाबेस प्रबंधन की सुविधा देता है।
लीला (LILA - Learn Indian Languages through Artificial Intelligence)
यह गैर-हिंदी भाषी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए तैयार किया गया एक मल्टीमीडिया स्वयं-शिक्षण (Self-Learning) वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप है।
इसके तहत प्रबोध, प्रवीण और प्राज्ञ पाठ्यक्रमों की पढ़ाई अंग्रेजी और 14 से अधिक प्रमुख भारतीय भाषाओं (तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला आदि) के माध्यम से की जा सकती है।
इसमें सही मौखिक उच्चारण सिखाने के लिए वाक् (Speech) तकनीक, वीडियो इंटरफेस और स्व-मूल्यांकन की सुविधा दी गई है।
ई-महाशब्दकोश एवं ई-सरल हिंदी वाक्यकोश
ई-महाशब्दकोश: प्रशासनिक एवं तकनीकी शब्दावली का द्विभाषी और द्विदिशीय (हिंदी-अंग्रेजी / अंग्रेजी-हिंदी) ऑनलाइन शब्दकोश व ऐप है। इसमें शब्दों के अर्थ के साथ-साथ उनका सही ऑडियो उच्चारण और व्याकरणिक संदर्भ भी उपलब्ध है।
ई-सरल वाक्यकोश: सरकारी टिप्पणियों (Noting) और प्रारूपण (Drafting) में बार-बार प्रयुक्त होने वाले मानक वाक्यों का द्विभाषी संग्रह, जिससे कर्मचारी सीधे मानक प्रशासनिक वाक्यांश चुनकर फाइलों पर काम कर सकें।
डिजिटल निगरानी व ई-प्रशासन (QPR और नराकास पोर्टल)
केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों द्वारा भेजी जाने वाली तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) को ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था।
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की बैठकों, निरीक्षणों और वार्षिक कार्यक्रमों के लक्ष्यों की प्रगति को ट्रैक करने के लिए ऑनलाइन प्रबंधन प्रणाली।
यूनिकोड और ओपन-सोर्स मानकीकरण
सरकारी तंत्र के सभी कंप्यूटरों में यूनिकोड समर्थित देवनागरी फॉन्ट (जैसे मंगल, एरियल यूनिकोड), इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड तथा फोनेटिक टाइपिंग को अनिवार्य रूप से लागू करने की नीति।
ई-ऑफिस (e-Office), सरकारी वेबसाइटों और डिजिटल पोर्टलों को द्विभाषी स्वरूप में तैयार करने के लिए तकनीकी
मार्गदर्शन और मानकीकरण दिशानिर्देश।
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