अमेरिकन शिक्षा विभाग के डिजिटल संग्रह में मेरा योगदान*

अमेरिकन शिक्षा विभाग के डिजिटल संग्रह में मेरा योगदान 


जब भारतीय भाषाओं और तकनीक ने बनाई वैश्विक पहचान: एक प्रेरणादायी योगदान!  



Gateway to Educational Materials (GEM) अमेरिकी शिक्षा विभाग (U.S. Department of Education) और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ एजुकेशन की पहल थी, जिसे सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी के इंफॉर्मेशन इंस्टीट्यूट (ERIC Clearinghouse on Information and Technology) ने विकसित और संचालित किया। 


1996-97 के आसपास शुरू हुई इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर बिखरे शैक्षिक संसाधनों (पाठ योजनाएँ, पाठ्यक्रम इकाइयाँ, शिक्षक गाइड आदि) को संगठित करना और शिक्षकों, छात्रों तथा अभिभावकों को “one-stop” खोज सुविधा प्रदान करना था।

इसकी आधार संरचना डबलिन कोर (Dublin Core) थी।


१९९० और २००० के दशक में जब डिजिटल शिक्षा और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (OER) अपनी प्रारंभिक अवस्था में थे, तब अमेरिकी शिक्षा विभाग तथा सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित Gateway to Educational Materials (GEM) परियोजना दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहलों में से एक बनकर उभरी। यह मंच शैक्षिक सामग्रियों के मेटाडेटा को व्यवस्थित रूप से कैटलॉग करके वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराने का कार्य करता था।  


इसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ओर से एक विशेष और दूरदर्शी भूमिका निभाई श्री विजय प्रभाकर नगरकर (तत्कालीन सहायक निदेशक – राजभाषा, बीएसएनएल, अहमदनगर) ने। सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी के सूचना संस्थान ने उन्हें आधिकारिक रूप से GEM Consortium Member के रूप में मान्यता प्रदान की।  


उनके प्रमुख योगदान इस प्रकार रहे:  


- उन्होंने भारतीय भाषाओं तथा भाषाई तकनीक से जुड़ी डिजिटल शिक्षण सामग्रियों को अंतरराष्ट्रीय GEM मेटाडेटा मानकों के अंतर्गत वैश्विक कैटलॉग में दर्ज कराया। इससे भारतीय भाषाई संसाधनों को विश्व स्तर पर दृश्यता मिली। 

 

- २९ अक्टूबर २००४ को सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी से प्राप्त आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया कि १ जनवरी २००५ से GEM नीति में बदलाव किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत मेटाडेटा का वितरण गैर-लाभकारी के साथ-साथ व्यावसायिक उपयोग के लिए भी खोला जा रहा था। 

 

- इस नीति परिवर्तन के बावजूद श्री नागरकर ने दृढ़तापूर्वक अपने मौजूदा योगदान को केवल गैर-लाभकारी और विशुद्ध शैक्षिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। उन्होंने तृतीय-पक्ष वितरण से अपने रिकॉर्ड को बाहर रखने का विकल्प चुना, जिससे उनके द्वारा प्रदत्त भारतीय भाषाई सामग्री का व्यावसायिक दोहन न हो सके।  


यह निर्णय उस समय विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण था जब डिजिटल संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग की प्रवृत्ति बढ़ रही थी। व्यक्तिगत निष्ठा और क्षमता के बल पर भारतीय भाषाई संपदा को वैश्विक डिजिटल रिपॉजिटरी में स्थापित करने का उनका यह प्रयास आज भी अनुकरणीय उदाहरण है।  


GEM परियोजना के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया कि भारतीय भाषाएँ और भाषाई तकनीक वैश्विक शिक्षा व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। उनका योगदान ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज, डिजिटल इंडिया और भाषाई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।  


(यह रिपोर्ट सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी के आधिकारिक पत्र दिनांक २९ अक्टूबर २००४ तथा संबंधित तथ्यों पर आधारित है।)


'गेटवे टू एजुकेशनल मटेरियल्स' (GEM) प्रोजेक्ट वर्तमान में अपने मूल रूप में सक्रिय नहीं है; इसे आधिकारिक तौर पर बंद और संग्रहीत (Archived/Discontinued) कर दिया गया है।

इस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति और इसके विकास से जुड़े प्रमुख पहलू:

  • वेबसाइट और पोर्टल की स्थिति:

    • प्रोजेक्ट की मूल वेबसाइट (www.thegateway.org) अब बंद हो चुकी है और यह डोमेन किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित हो चुका है।

    • इसके शुरुआती कैटलॉग, रिसर्च पेपर्स और संबंधित दस्तावेज अब केवल डिजिटल वेब आर्काइव्स (Web Archives) और शैक्षिक शोध पत्रिकाओं में संदर्भ के लिए सुरक्षित हैं।

  • नाम परिवर्तन और विस्तार (2005 के बाद):

    • वर्ष 2005 में 'ओपन एक्सेस' नीति लागू होने के बाद, आधुनिक डिजिटल शिक्षा की जरूरतों को देखते हुए इसका नाम बदलकर 'The Gateway to 21st Century Skills' किया गया था।

    • इसके तहत 'नेशनल एजुकेशन एसोसिएशन' (NEA) और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर 21वीं सदी के कौशल-आधारित पाठ्यक्रम को इस नेटवर्क से जोड़ा गया था।

  • प्रोजेक्ट बंद होने के मुख्य कारण:

    • आधुनिक सर्च इंजनों का उदय: 1996 से 2004 के दौर में इंटरनेट पर गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक सामग्री खोजना कठिन था, इसलिए GEM जैसी डायरेक्टरी की आवश्यकता थी। बाद में गूगल जैसे सर्च इंजनों के उन्नत एल्गोरिदम के कारण इंटरनेट पर सीधे रिसोर्स खोजना आसान हो गया।

    • फंडिंग और पुनर्गठन: अमेरिकी शिक्षा विभाग (U.S. Department of Education) द्वारा 'ERIC' (Educational Resources Information Center) प्रणाली के पुनर्गठन के चलते सिराक्यूज यूनिवर्सिटी के इस उपक्रम का सरकारी वित्तीय अनुदान धीरे-धीरे समाप्त हो गया।

    • नए प्लेटफॉर्म्स का आगमन: समय के साथ 'OER Commons' और आधुनिक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम्स (LMS) जैसे नए विकल्प आ जाने से उपयोगकर्ताओं का रुख उनकी ओर हो गया।

  • प्रोजेक्ट की तकनीकी विरासत और महत्व (Legacy):

    • प्रोजेक्ट भले ही बंद हो चुका हो, लेकिन GEM द्वारा तैयार किए गए 'GEM Metadata Standards' (जो डबलिन कोर मेटाडेटा पर आधारित थे) ने डिजिटल लाइब्रेरी साइंस में एक मानक स्थापित किया।

    • आज दुनिया भर में उपयोग होने वाले OER (Open Educational Resources), डिजिटल शैक्षणिक रिपॉजिटरी और ऑनलाइन पाठ्यक्रम सामग्री के वर्गीकरण (Resource Tagging) की मजबूत नींव इसी GEM प्रोजेक्ट के शोध से तैयार हुई थी।


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