सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

फेसबुक पर राजभाषा विभाग की उपस्थिति

अब राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने फेसबुक पर अपनी उपस्थिति दर्ज की है। हम राजभाषा विभाग के इस कदम का हार्दिक स्वागत करते है। फेसबुक संवाद का सशक्त माध्यम है। इसके द्वारा युवकों को आकर्षित करके उनके विचारों को समझने में मदद मिलेगी। राजभाषा विभाग ने तकनीकी क्षेत्र में अपना कदम रखा है। अनेक हिंदी ब्लॉगर, लेखक अब फेसबुक पर राजभाषा विभाग के पृष्ठ पर अपने विचार,प्रतिक्रियाएँ दे सकते है।
राजभाषा विभाग के तकनीकी अधिकारी श्री. केवल कृष्णन प्रशंसा के पात्र है। उन्होंने लिखा है कि -

      " राजभाषा के प्रचार-प्रसार हेतु फेसबुक की क्षमता का उपयोग करके करोड़ों  लोगों से जुड़कर, उन्हें राजभाषा के प्रचार-प्रसार में जोड़ा जा सकता है जिससे उन्हेंस राजभाषा विभाग की नीतियों और कार्य-कलापों से अवगत कराकर उनका फीडबैक भी लिया जा सकता है।  भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग/
कार्यालय भी इसके माध्यय से राजभाषा विभाग संबंधी जानकारी प्राप्त  कर सकते हैं।

       फेसबुक पर राजभाषा विभाग द्वारा निम्नं गतिविधियां की जा सकती हैं :

  •  विभाग तथा विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों की महत्वपूर्ण गतिविधियां
  • हिंदी भाषा के शिक्षण हेतु केन्द्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान
  • केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा अनुवाद प्रशिक्षण संबंधी टिप्स
  • आई.टी. टूल्स के प्रयोग हेतु जानकारी एवं प्रयोगकर्ताओं की समस्याओं का समाधान
  • अनुसंधान प्रभाग एवं क्षेत्रीय कार्यान्वेयन कार्यालयों द्वारा विभिन्‍न गतिविधियों जैसे नगर राजभाषा कार्यान्व्यन समितियों की बैठक आदि की सूचना उपलब्ध  करवाना
     आइए हम राजभाषा विभाग के इस नए कदम का हार्दिक स्वागत करें और सक्रिय योगदान प्रदान करें।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राष्ट्रभाषा से राजभाषा की यात्रा में हिंदी

भारतीय संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम महामहिम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने लोकसभा में राज भाषा हिंदी पर हुई चर्चा के उपरांत दिनांक 14.9.1949 को सभा को संबोधित किया। राज भाषा हिंदी को स्वीकार करने पर उन्होंने हिंदीतर सदस्यों का विशेष आभार व्यक्त किया क्योंकि राष्ट्रीय एकता एवं स्वाभिमान के लिए किसी एक भारतीय भाषा को राज भाषा के रुप में स्वीकार करना आवश्यक था। इस भाषण में उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि राज भाषा हिंदी को बहुमत से स्वीकार किया गया है। वर्तमान राजनीति में हिंदी को राष्ट्र भाषा न मानने की होड़ लगी है जो देश की एकता के लिए घातक है। हमें भारतीय भाषा भगिनी परिवार में एकता एवं समन्वय रखना चाहिए क्योंकि इस राष्ट्र की संस्कृति एक है। जिस तरह एक देश, एक ध्वज,एक राष्ट्र गीत एवं एक राष्ट्र भाषा की संकल्प ना को विश्व में स्वीकार किया जाता है उसी तरह हमारे देश में राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए जो अनिवार्य भी और हितकारी भी होगा। भारतीय संविधान के कलम ३०१ के अनुसार हिंदी राज भाषा है जो देवनागरी लिपि में लिखी जाती ह…

सूचना प्रौद्योगिकी व्याख्या एवं परिचय

भाषा अभिव्यक्ती का सशक्त माध्यम है। भाषा मानव जीवन का अभिन्न अंग है। संप्रेषण के द्वारा ही मनुष्य सूचनाओं का आदान प्रदान एवं उसे संग्रहीत करता है। सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक अथवा राजनीतिक कारणों से विभिन्न मानवी समूहाओं का आपस में संपर्क बन जाता है। गत शताब्दी में सूचना और संपर्क के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति हुई है। इलेक्ट्रानिक माध्यम के फ़लस्वरूप विश्व का अधिकांश भाग जुड गया है। सूचना प्रौद्योगिकी क्रांती ने ज्ञान के द्वार खोल दिये है। बुद्धी एवं भाषा के मिलाप से सूचना प्रौद्योगिकी के सहारे आर्थिक संपन्नता की ओर भारत अग्रेसर हो रहा है। इलेक्ट्रानिक वाणिज्य के रूप में ई-कॉमर्स, इंटरनेट द्वारा डाक भेजना ई-मेल द्वारा संभव हुआ है। ऑनलाईन सरकारी कामकाज विषयक ई-प्रशासन, ई-बैंकींग द्वारा बैंक व्यवहार ऑनलाईन , शिक्षा सामग्री के लिए ई-एज्यूकेशन आदि माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी का विकास हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी के बहु आयामी उपयोग के कारण विकास के नये द्वार खुल रहे है। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रयागों का अनुसंधान करके विकास की ग…

आदिवासियों के लिए गुँजते रहेंगे - नगाड़े की तरह बजते शब्द

अभी हाल ही में संथाली भाषा को संविधान में प्रमुख भारतीय भाषा का दर्जा प्राप्त हुआ है। भारतीय ज्ञानपीठ ने संथाली भाषा की सशक्त कवयित्रि निर्मला पुतुल का काव्य संग्रह ' नगाडे की तरह बजते शब्द' का प्रकाशन किया है। झारखंड के दुमका की निर्मला पुतुल संथाल आदिवासी की नई सुशिक्षित पीढी का प्रतिनिधित्व करती है।
उनकी कविताओं में आदिवासी समाज की पीडा, अत्याचार शोषण के खिलाफ बेचैन आवाज निकलती है।
इस संग्रह के अलावा उनका दिल्ली के रमणिका फाउंडेशन द्वारा 'अपने घर की तलाश में ' संग्रह प्रकाशित हुआ है।
निर्मला पुतुल की रचनाएँ भारत की प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही है। साहित्य अकादमी नई दिल्ली ने उन्हें आदिवासी युवा कवियित्रि के रुप में पुरस्कृत किया है। यह पुरस्कार संथाली भाषा की सशक्त
रचनाकार होने के नाते उन्हें प्राप्त हुआ है। इनकी कविताओं का सशक्त हिंदी अनुवाद झारखंड के दुमका के हिंदी के सुपरिचित कवि श्री अशोक सिंह ने किया है।
हिंदी प्रदेश से संबंधित होने के कारण यह हिंदी साहित्य की नविन पहचान है। सुप्रसिध्द बांग्ला साहित्यकार महाश्वेता देवीजी ने उन्हें सम्मानि…