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हिंदी तिमाही बैठक में चर्चा करने हेतु विषयों की सूची

1. रबर-स्टैंप, फाईल कवर, रजिस्टरों के नाम, नामपट्ट आदि में हिंदी-अंग्रेजी का प्रयोग।
2. ग्राहकों के साथ मराठी/ हिंदी पत्राचार ।
3. हिंदी पत्रों का उत्तर हिंदी में देना ।
4. हिंदी पत्राचार का प्रतिशत बढाना ।
5. तिमाही हिंदी कार्यशाला का आयोजन ।
6. हिंदी पुस्तकें, शब्दकोश, हिंदी समाचार पत्र की खरीद ।
7. मराठी-हिंदी फॉर्म का प्रयोग ।
8. राज्य सरकार के साथ हिंदी पत्राचार करना ।
9. मा. संसद सदस्य, मा. विधायक, मा. दूरसंचार सल्लागार समिति सदस्य आदि महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ
हिंदी पत्राचार करना ।
10. हिंदी पत्राचार के आकडों के लिए आवक-जावक रजिस्टर रखना ।
11. पूराने कंप्यूटर के विंडो 98 पर सुशा, एस.एल.भारती, बरह आदि मुफ्त हिंदी सॉफ्टवेअर का प्रयोग करना ।
12. नए कंप्यूटर ( विंडो 2000, विंडो विस्टा , एक्स-पी आदि में हिंदी यूनिकोड सक्रिय करना
13. तिमाही राजभाषा प्रगति रिपोर्ट भाग I भेजना ।
14. हिंदी प्रोत्साहन योजना पुरस्कार में सहभाग हेतु प्रोत्साहित करना ।
15. हर वर्ष सितंबर में हिंदी पखवाडा एवं 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाना ।
16. कार्यालय के सभी फॉर्म द्विभाषी बनाना ।
17. राजभाषा कार्यान्वयन हेतु जाँच-बिंदु निश्चित करना ।
18. उपस्थिति रजिस्टर हिंदी में बनाना ।
19. हिंदी में हस्ताक्षर करना ।
20 अग्रेषण पत्र, स्मरण पत्र, पृष्ठांकन, छुट्टी का आवेदन पत्र, अग्रिम राशि ( यात्रा, एल.टी.सी, जी.पी.एफ
आदि ) में हिंदी का प्रयोग अनिवार्य करना ।
21. राजभाषा वार्षिक कार्यक्रम पर चर्चा करना ।
22. राजभाषा निरीक्षण हेतु रिकार्ड रखना ।

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राष्ट्रभाषा से राजभाषा की यात्रा में हिंदी

भारतीय संविधान सभा के तत्कालीन अध्यक्ष एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम महामहिम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने लोकसभा में राज भाषा हिंदी पर हुई चर्चा के उपरांत दिनांक 14.9.1949 को सभा को संबोधित किया। राज भाषा हिंदी को स्वीकार करने पर उन्होंने हिंदीतर सदस्यों का विशेष आभार व्यक्त किया क्योंकि राष्ट्रीय एकता एवं स्वाभिमान के लिए किसी एक भारतीय भाषा को राज भाषा के रुप में स्वीकार करना आवश्यक था। इस भाषण में उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि राज भाषा हिंदी को बहुमत से स्वीकार किया गया है। वर्तमान राजनीति में हिंदी को राष्ट्र भाषा न मानने की होड़ लगी है जो देश की एकता के लिए घातक है। हमें भारतीय भाषा भगिनी परिवार में एकता एवं समन्वय रखना चाहिए क्योंकि इस राष्ट्र की संस्कृति एक है। जिस तरह एक देश, एक ध्वज,एक राष्ट्र गीत एवं एक राष्ट्र भाषा की संकल्प ना को विश्व में स्वीकार किया जाता है उसी तरह हमारे देश में राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए जो अनिवार्य भी और हितकारी भी होगा। भारतीय संविधान के कलम ३०१ के अनुसार हिंदी राज भाषा है जो देवनागरी लिपि में लिखी जाती ह…

सूचना प्रौद्योगिकी व्याख्या एवं परिचय

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आदिवासियों के लिए गुँजते रहेंगे - नगाड़े की तरह बजते शब्द

अभी हाल ही में संथाली भाषा को संविधान में प्रमुख भारतीय भाषा का दर्जा प्राप्त हुआ है। भारतीय ज्ञानपीठ ने संथाली भाषा की सशक्त कवयित्रि निर्मला पुतुल का काव्य संग्रह ' नगाडे की तरह बजते शब्द' का प्रकाशन किया है। झारखंड के दुमका की निर्मला पुतुल संथाल आदिवासी की नई सुशिक्षित पीढी का प्रतिनिधित्व करती है।
उनकी कविताओं में आदिवासी समाज की पीडा, अत्याचार शोषण के खिलाफ बेचैन आवाज निकलती है।
इस संग्रह के अलावा उनका दिल्ली के रमणिका फाउंडेशन द्वारा 'अपने घर की तलाश में ' संग्रह प्रकाशित हुआ है।
निर्मला पुतुल की रचनाएँ भारत की प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही है। साहित्य अकादमी नई दिल्ली ने उन्हें आदिवासी युवा कवियित्रि के रुप में पुरस्कृत किया है। यह पुरस्कार संथाली भाषा की सशक्त
रचनाकार होने के नाते उन्हें प्राप्त हुआ है। इनकी कविताओं का सशक्त हिंदी अनुवाद झारखंड के दुमका के हिंदी के सुपरिचित कवि श्री अशोक सिंह ने किया है।
हिंदी प्रदेश से संबंधित होने के कारण यह हिंदी साहित्य की नविन पहचान है। सुप्रसिध्द बांग्ला साहित्यकार महाश्वेता देवीजी ने उन्हें सम्मानि…